लोक कथाएँ
कहानियाँ और किंवदंतियाँ
सर्दियों की रातों में चूल्हे के पास सुनाई गईं, मेलों में हुड़कियों ने गाईं और गाँव के उत्सवों में नाच-नाचकर जी गईं कहानियाँ। हर गाँव इन्हें थोड़ा अलग ढंग से सुनाता है — लोककथाएँ ऐसे ही जीवित रहती हैं।
क्या आपका परिवार इनमें से कोई कहानी अलग ढंग से सुनाता है? क्या आप अपने गाँव की कोई ऐसी कहानी जानते हैं जो यहाँ नहीं है? इसे संग्रह के साथ साझा करें.









