गढ़वाल · किंवदंती
माधो सिंह भंडारी और मलेथा की कूल
एक सेनापति, जो सूखे गाँव तक पानी लाया — सबसे बड़ी क़ीमत चुकाकर।

माधो सिंह भंडारी गढ़वाल के राजाओं के प्रसिद्ध सेनापति थे, तिब्बत के विरुद्ध लड़ाइयों के नायक। उनके अपने गाँव मलेथा की ज़मीन उपजाऊ थी, पर वहाँ पानी नहीं था।
नदी का पानी खेतों तक लाने की ठानकर माधो सिंह ने पहाड़ की धार के आर-पार एक सुरंग खुदवाई। पर जब सुरंग बनकर तैयार हुई, तो पानी आगे नहीं बहा।
किंवदंती है कि देवी ने सपने में आकर बलिदान माँगा। माधो सिंह के इकलौते बेटे गजे सिंह ने ख़ुद को अर्पित कर दिया। पानी बह निकला, और मलेथा के खेत हरे हो उठे।
मलेथा की 'कूल' (सिंचाई की नहर) आज भी पहाड़ों की सबसे पुरानी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिनी जाती है। लोक-परंपरा गढ़वाल की देर से आने वाली दीवाली, इगास बग्वाल, को भी उस दिन से जोड़ती है जब माधो सिंह के विजयी होकर लौटने की ख़बर घर पहुँची थी।
सबकी भलाई के लिए बलिदान — और यह कि पहाड़ पानी का मोल कितनी गहराई से समझते हैं।
अगली कहानीतीलू रौतेली