
अल्मोड़ा
1563 से चंद राजाओं की राजधानी और कुमाऊँ का सांस्कृतिक हृदय।
प्रसिद्ध है: जागेश्वर धाम · चितई गोलू देवता · कसार देवी · रानीखेत
अल्मोड़ा को जानेंकुमाऊँ · गढ़वाल
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1563 से चंद राजाओं की राजधानी और कुमाऊँ का सांस्कृतिक हृदय।
प्रसिद्ध है: जागेश्वर धाम · चितई गोलू देवता · कसार देवी · रानीखेत
अल्मोड़ा को जानेंपूर्वी मंडल, ऐतिहासिक रूप से मानसखंड, जिस पर पहले कत्यूरियों ने और फिर चंपावत व अल्मोड़ा से चंद राजाओं ने शासन किया। कुमाऊँ अपनी ऐपण कला, बैठकी होली, छोलिया नृत्य, गोलू देवता के न्याय-मंदिरों, और नंदा देवी, त्रिशूल व पंचाचूली को निहारती सीढ़ीदार घाटियों के लिए जाना जाता है।
पिथौरागढ़ · बागेश्वर · अल्मोड़ा · चंपावत · नैनीताल · ऊधम सिंह नगर
पश्चिमी मंडल, ऐतिहासिक रूप से केदारखंड — ‘गढ़ों की भूमि’ — जो पंवार राजाओं द्वारा एकीकृत किए जाने से पहले 52 गढ़ों में बँटा था। गढ़वाल में चारधाम (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ), गंगा और यमुना के उद्गम, पांडव नृत्य की परंपरा, और जीवन के हर संस्कार के साथ गूँजने वाला ढोल-दमाऊ संगीत है।
उत्तरकाशी · देहरादून · टिहरी गढ़वाल · रुद्रप्रयाग · चमोली · पौड़ी गढ़वाल · हरिद्वार
ज़िलों की सीमाएँ नई हैं। पुराने नामों वाली घाटियाँ और इलाक़े आज भी अपनी गहरी पहचान रखते हैं — और अक्सर अपनी बोली भी।
देहरादून (चकराता)
एक जनजातीय क्षेत्र, जिसकी अपनी जौनसारी भाषा, विशिष्ट नातेदारी और ग्राम-पंचायत परंपराएँ, महासू देवता की पूजा, बिस्सू व मरोज़ पर्व और हारुल नृत्य हैं।
उत्तरकाशी / टिहरी
यमुना के किनारे की घाटियाँ, जहाँ अलग बोलियाँ, लकड़ी की कोटी-बनाल स्थापत्य शैली और सोमेश्वर व कपिल मुनि जैसे देवता हैं।
पिथौरागढ़ (मुनस्यारी, मिलम)
जोहारी शौका व्यापारियों की घाटी, जो दर्रों के पार तिब्बत तक नमक, ऊन और सुहागा ले जाते थे।
पिथौरागढ़ (धारचूला)
तिब्बती-बर्मी भाषाएँ बोलने वाले रं लोगों की मातृभूमि; लिपुलेख होकर जाने वाला कैलाश–मानसरोवर मार्ग।
चमोली
धौली और अलकनंदा घाटियों के सबसे ऊँचे गाँव, मार्छा और तोल्छा भोटिया समुदायों का घर।
बागेश्वर
कत्यूर घाटी कत्यूरी राजाओं की गद्दी थी; दानपुर अपने वनों, पिंडर घाटी और लोकगाथाओं के लिए जाना जाता है।
पिथौरागढ़
कटोरे जैसी एक चौड़ी घाटी, जिसे कभी-कभी ‘छोटा कश्मीर’ कहा जाता है, और जो हिलजात्रा व कुमाऊँनी लोक-रंगमंच के लिए प्रसिद्ध है।
ऊधम सिंह नगर / नैनीताल / चंपावत
पहाड़ों की तलहटी में वनों और मैदानों की पट्टी, थारू और बुक्सा का घर, और आज राज्य का कृषि-हृदय।