PYRE (चिता)

ट्रेलर देखें
मुख्य सामग्री पर जाएँ
मेरा उत्तराखंड

कोई जगह, त्योहार, व्यंजन, गीत या व्यक्ति खोजें — जैसे अल्मोड़ा, हरेला, काफुली, नेगी

संस्कृति

संस्कृति

ऋतुओं का संदेश देते त्योहार, जीवन के हर संस्कार में गूँजते ढोल, सीढ़ीदार खेतों का भोजन, और वे देवता जो पड़ोस के गाँव में रहते हैं।

Ramman, religious festival and ritual theatre of the Garhwal Himalayas, India
© Arvind Mudgil · CC BY-SA 3.0 igo

त्योहार और मेले

कई पहाड़ी त्योहार संक्रांति के दिन पड़ते हैं — जिस दिन सूर्य नई राशि में प्रवेश करता है — और खेती-बाड़ी के साल से जुड़े होते हैं।

पहाड़ी वर्ष

महीने अनुमानित हैं — कई तिथियाँ चंद्र या सौर हिंदू पंचांग के अनुसार चलती हैं और हर साल बदलती हैं। इस महीने को हाइलाइट किया गया है।

जन॰

घुघुतिया / उत्तरायणी, मरोज़ (जौनसार)

फ़र॰

बसंत पंचमी, खड़ी होली का आरंभ

मार्च

होली, फूलदेई

अप्रैल

बिस्सू (जौनसार), बैसाखी के मेले

मई

रम्माण, चारधाम यात्रा का शुभारंभ

जून

गंगा दशहरा

जुला॰

हरेला

अग॰

घी संक्रांति, देवीधुरा की बग्वाल, हिलजात्रा

सित॰

नंदा देवी मेला, खतड़ुवा

अक्टू॰

दशहरा, दीवाली (कुछ वर्षों में)

नव॰

इगास बग्वाल, जौलजीबी मेला, स्थापना दिवस (9 नवंबर)

दिस॰

पांडव नृत्य का मौसम, धामों के देवताओं की शीतकालीन गद्दियाँ

नृत्य और अनुष्ठान

पहाड़ों में नृत्य शायद ही कभी दर्शकों के लिए किया जाने वाला प्रदर्शन होता है — इसमें पूरा गाँव, और कभी-कभी देवता भी, शामिल हो जाते हैं।

संगीत और वाद्य

सीढ़ीदार खेतों का भोजन

सीढ़ीदार खेतों में उगे मोटे अनाज, दालें और साग — सादा, धीमी आँच पर पका और भरपूर पौष्टिक।

पहनावा और आभूषण

कला और शिल्प

उत्तराखंड के कई शिल्पों को अब भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल चुका है।

लोक देवता

हिमालय के बड़े तीर्थों के साथ-साथ हर गाँव के अपने देवता हैं — खेतों, जंगलों, न्याय और परिवार के रक्षक।