गढ़वाल और कुमाऊँ · किंवदंती
फ्योंली — पीला फूल
जंगल की वह लड़की, जिसकी याद हर वसंत फूलदेई पर खिल उठती है।

फ्योंली जंगल की बेटी थी। पंछी, हिरण और पेड़ ही उसका परिवार थे, और उसके आसपास पहाड़ हरे-भरे और ख़ुशहाल रहते थे।
एक दिन शिकार खेलते हुए एक राजकुमार रास्ता भटक गया और उसे फ्योंली मिल गई। उसकी सुंदरता पर मुग्ध होकर उसने उससे ब्याह कर लिया और उसे नीचे अपने महल में ले गया। पर महल में फ्योंली मुरझाने लगी। उसे जंगल की याद सताती थी, और जंगल को उसकी — पेड़ सूखने लगे, धाराएँ पतली पड़ गईं और जानवर चुप हो गए।
उसने घर लौटने की बहुत विनती की, पर महल ने उसे जाने नहीं दिया। आख़िर वह बीमार पड़ गई, और उसकी अंतिम इच्छा थी कि उसे पहाड़ों में ही दफ़नाया जाए।
जहाँ उसे सुलाया गया, वहाँ एक छोटा-सा, चटक पीला फूल खिला — फ्योंली। हर वसंत जब यह ढलानों पर खिलता है, तो बच्चे इसे बुरांश के साथ तोड़ते हैं और फूलदेई पर हर देहरी पर बिखेरते हैं, उस लड़की को याद करते हुए जो पहाड़ों की थी।
जंगल और उसके लोग एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।
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