
देवभूमि उत्तराखंड
पहाड़ याद राखनी। हमूँ लै याद राखण चैं।
उत्तराखंड क एक खुल संग्रह — कुमाऊँ और गढ़वाल क इतिहास, हमरि बोली-भाषा, गीत, किताब, त्यार और ऊ काथ जो हमार आम-बुबु आगक नजिक बैठि सुणूँछी।
सिनेमाघरों में · 30 अक्टूबर 2026
PYREचिता
Vinod Kapri · Gulzar · Mychael Danna
30 अक्टूबर 2026 बटी सिनेमाघरों में। यां आधिकारिक ट्रेलर देखो, फिर BookMyShow में आपणि सीट बुक करो।
धरती कैं देखो
तेर जिल, द्वी पुराण राज। जिल देखण लिजी माउस धरो, भितेर जाण लिजी थपकाओ।
गढ़वाल और कुमाऊँ में जिल
नंदा देवी, सबूँ है ठुलि चोटि
ठुल गाड़ों क मुहान — गंगा और यमुना
पहाड़ और तराई में बोलि जाणी भाषा
पहाड़ कि काथ
जिंद परंपरा
मुखौट वाल नाटक, तलवारक नाच, ऐपण और रात-भर क जागर — यो संस्कृति आज लै करी जैं, खाली याद नि करी जानि।
बेड़ू पाको बारो मासा,
नरैण काफल पाको चैता
“बेडु पाको बारमासा, काफल पाको चैत” — यो लोक गीत हर पहाड़ी कैं याद छ।
पुस्तकालय में सुणो
यो संग्रह किलै?
रोजगार लिजी परिवार देश (मैदान) न्है गईं, और सैकड़ों गौं खालि है गईं। हर बंद कुड़ि दगै चुपचाप कुछ हरै जां — एक शब्द, एक पकवान, रोपाई क एक गीत, गौं क द्याप्त क नाम।
यो संग्रह यो सब एक ठौर में, मुफ्त, सबूँ लिजी जोड़ूँ — खास करि ऊँ पहाड़ी नान्तिनों लिजी जो भ्यार रूनी और जाणन चानी कि ऊँ काँ क छन।






