गढ़वाल और कुमाऊँ · पुराण काथ
नंदा जाणी आपण सौरास
पहाड़ कि चेलि-देवी और राजजात कि यात्रा।

पहाड़ में नंदा क्वे दूर कि देवी न्हाँ — ऊ एक चेलि छ। पहाड़ में जनमी, कैलाश में रूणी शिव दगै ब्याई, ऊ हर ऊ पहाड़ी चेलि छ जो ब्या क बाद आपण मैत छोड़ैं।
गीत कूँनी कि एक बार नंदा आपण मैत ऐ और भौत दिन रै गै, और धरती बेचैन है गै जब तक वीकैं भेंट-कोसेलि दगै ठीक ढंग ल वापस नि भेजौ। तब बटी वीक लोग वीकैं धूमधाम ल सौरास पुजूनी।
योई छ नंदा देवी राजजात: नौटी गौं बटी एक यात्रा जो जंगल, बुग्याल और हड्डियों वाल ताल रूपकुंड पार करि बेर होमकुंड तक चढ़ैं, जैकि अगुवाई चार सींग वाल एक खाड़ (मेढ़) करूँ जो वीकि भेंट ल्हि जां। होमकुंड में ऊ खाड़ यकलै डानों में अघिल न्है जां।
बाट में गाई जाणी गीत ऊ इज क आँसु और आशीष ल भरी छन जो आपणि चेलि कैं विदा करणै — यैक लिजी राजजात हर पहाड़ी क मन कैं छू ल्हिं।
पहाड़ आपणि देवी कैं परिवार मानूँ।
अघिल काथकाफल पाको, मैं नि चाखो