संस्कृति
संस्कृति
ऋतुओं कैं बताणी त्यार, जिंदगी क हर संस्कार में बजणी ढोल, सीढ़ीदार खेतों क खाण, और ऊ द्याप्त जो बगलक गौं में रूनी।

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त्यार और कौतिक
भौत पहाड़ी त्यार संग्रांद क दिन पड़नी — जै दिन सूर्ज नई राशि में जां — और ऊँ खेति-बाड़ि क साल दगै जुड़ि छन।
पहाड़ी साल
लगभग महैण — कतुकै तिथि चंद्र या सौर हिंदू पंचांग क हिसाब ल चलनी और हर साल बदलनी। यो महैण चमकाई छ।
जन
Ghughutiya / Uttarayani, Maroj (Jaunsar)
फर
Basant Panchami, Khadi Holi begins
मार्च
Holi, Phool Dei
अप्रै
Bissu (Jaunsar), Baisakhi fairs
मई
Ramman, Char Dham yatra opens
जून
Ganga Dussehra
जुला
Harela
अग
Ghee Sankranti, Bagwal at Devidhura, Hilljatra
सित
Nanda Devi mela, Khatarua
अक्टू
Dussehra, Diwali (some years)
नव
Egaas Bagwal, Jauljibi mela, Foundation Day (9 Nov)
दिस
Pandav Nritya season, winter seats of the Dham deities
नाच और पूज
पहाड़ में नाच कम्मै देखणियों लिजी हुँ — यमें पुर गौं, और कभतै द्याप्त लै, शामिल है जानी।
गीत और बाज
सीढ़ीदार खेतों क खाण
सीढ़ीदार खेतों में उगी मोट अनाज, दाव और साग — सीद, धीमी आग में पकी और भौत ताकत दिणी।
पैरवाव और जेवर
कला और हस्तकला
उत्तराखंड कि कतुकै हस्तकलाओं कैं आब भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिलि गो।
लोक द्याप्त
हिमालय क ठुल धामों क दगड़ै, हर गौं क आपण द्याप्त छन — खेत, जंगल, न्याय और परिवार क रखवाव।



















































