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सब काथ

कुमाऊँ · गाथा

राजुला और मालूशाही

हिमालय कि ठुलि प्रेम गाथा — एक व्यापारी कि चेलि और एक कत्यूरी राजकुमार।

Panchachuli peaks view from "Thamri Kund"
© Pranavspn · CC BY-SA 3.0

राजुला सुनपति शौका कि चेलि छी, जो ऊँच घाटियों क एक धनी व्यापारी छी और आपण भेड़-बकरों दगै तिब्बत जाँछी। मालूशाही बैराठ क राजकुमार छी, कत्यूरी वंश क। द्विनों क इज-बौज्यू ल जनम क बखतै ऊँ कैं एक-दुसर लिजी बचन दि हालछी।

पर सुनपति ल आपण मन बदलौ और राजुला कैं एक ताकतवर हुणिया (तिब्बती) व्यापारी कैं देण क बचन दि दे। राजुला, जो मालूशाही कैं कभतै नि भुलि, वीकैं ढूँढण लिजी यकलै पहाड़ पार करि बेर बैराठ हुँ न्है गै।

मालूशाही क परिवार ल वीकैं नश कि चीज खवै दे ताकि ऊ बिजि बेर राजुला कैं नि मिलि सको। राजुला आपणि औंठि वीकि आँगुव में पैरै बेर दुखी मन ल वापस न्है गै। जब ऊ बिजौ और औंठि देखी, मालूशाही ल आपण महल छोड़ि दे, गुरु गोरखनाथ है जोगी कि विद्या सिखी, और भेष बदलि बेर भोटियों क देश हुँ चलि दे।

गाथा में विष वाल खाण, जादू कि नीन, और गुरु क हातों मालूशाही क बचण कि बात छ। ज्यादातर रूपों में आखिर में द्विए प्रेमी मिलि जानी।

सदियों बटी कुमाऊँ क हुड़क्या (बाजगी) यकैं कतुकै रातों तक गानै आईं; मोहन उप्रेती ल यकैं मंच लिजी तैयार करौ, और आज लै यो पहाड़ कि सबूँ है नामी प्रेम काथ छ।

ऊ प्रेम जो डान, जात और राज पार करि जां।

अघिल काथजीतू बगड्वाल और आँछरी