कुमाऊँ · दंतकथा
गोलु द्याप्त और काठ क घ्वड़
न्याय क द्याप्त ल एकै सवाल ल सच कसिक साबित करौ।

कत्यूरी वंश क राज झलराई कि सात राणि छी पर क्वे वारिस नि छी। शिकार में वीकि भेट कालिंका दगै भै, जो भौत ताकतवर और भलि सैणि छी, और वील वीदगै ब्या करौ। जब कालिंका क नान हुणी छी, जलणी राणियों ल वीक आँख बाँधि दी, नई पैद भई च्यल कि जाग एक ढुंग धरि दे, और नान कैं एक पिंजड़ में धरि बेर गाड़ में बगै दे।
एक माछ मारणी कैं ऊ पिंजड़ मिलौ और वील च्यल कैं आपण जस पालौ। जब नान ल एक घ्वड़ मांगौ, माछ मारणी ल वीकैं काठ क घ्वड़ बणै दे — और कूँनी कि च्यल ल वीकैं जिंद करि दे।
एक दिन च्यल आपण काठ क घ्वड़ में चढ़ि बेर ऊ गाड़ क किनार पुजौ जाँ सातों राणि नाणैछी, और घ्वड़ कैं पाणि पिवूण लागौ। राणि हँसि: 'मूरख, काठ क घ्वड़ पाणि कसिक पि सकूँ?'
वील जवाब दे: 'जब एक सैणि ढुंग कैं जनम दि सकें, तो काठ क घ्वड़ पाणि किलै नि पि सकन?'
यो बात राज तक पुजी। सच भ्यार ऐ गो, कालिंका कैं मान मिलौ, और च्यल राज बणौ — जैकैं पुर न्याय करणी राज क रूप में याद करी जां। आज गोलु द्याप्त कि पूज चितई, घोड़ाखाल और चंपावत में हैं, जाँ अन्याय क मारी लोग ऊँ कैं आपणि अर्जी लेखनी, और न्याय मिलण पर घंटि चढ़ूनी।
सच आपण बाट ढूँढि ल्हिं, और न्याय सबूँ क हक छ।
अघिल काथराजुला और मालूशाही