गढ़वाळ · वीरांगना
तीलू रौतेली
पंद्रा बरस की एक नौनि जु अपणि धरती बचौण कु घ्वड़ा पर चढ़िक लड़ै मा ग्याई।

तीलू रौतेली कु जलम पौड़ी का गुराड़ गौं मा ह्वे, वा गढ़वाळ राज का एक सेनापति भूपू सिंह गोर्ला की ब्यटुलि छै। कत्यूरी सरदार धाम शाही का हमलौं न इलाका मा लड़ै छेड़ि दे, अर तीलू न लड़ै मा अपणु बुबा, अपणा द्वी भैजी अर अपणु मंगेतर खोई दे।
सिरफ पंद्रा बरस की उमर मा वींन तलवार उठै। अपणि घोड़ी बिंदुली पर चढ़िक, अपणि वफादार सहेलि बेल्लू अर रक्की का दगड़ि, वींन लोगौं की अगवाई करि अर कतगि बरसौं मा एक-एक करिक गढ़ वापिस जीतिनि।
गाथा बोल्दन कि जब वा गाड मा नहाणी छै अर हथियार अलग धर्यां छा, तब एक दुश्मन सिपै न वींतैं मारि दे — वींतैं हराण कु बस यी एक बाटु छौ।
गढ़वाळ वींतैं अपणि रानी लक्ष्मीबाई का रूप मा याद करद। जनान्यौं खुणि राज्य कु सबसे बड़ु सम्मान, तीलू रौतेली पुरस्कार, वींका ही नौं पर च।
हिम्मत की क्वी उमर नि होंद।
अगलि कथाशिव पांडवौं से लुकिन — पंच केदार