हम पहाड़ी
हम कु छौं
पहाड़ी — पहाड़ौं का लोग। सेरा-पुंगड़ौं का किसान, गढ़वाल राइफल्स अर कुमाऊँ रेजिमेंट का सिपै, ऊँचा धुरौं का बैपारी, बणौं अर गीतौं का रखवाळ।

हमारा समाज
उत्तराखंड एक संस्कृति नी, कतगि संस्कृति छन, जु सदियौं मा एक-दुसरा मा बुणेगेन।
कुमाऊँनी अर गढ़वळि
पहाड़ का ज्यादातर लोग, जु कुमाऊँनी अर गढ़वळि बोल्दन। ऊंका पुरखौं मा हिमालै का पुराणा खस लोग अर बाद मा देस बटि ऐकि बस्यां लोग छन। गौं की जिंदगी सेरा-पुंगड़ौं, गोर-बछरौं, बणौं अर गौं का द्यब्ता का ध्वार घुमदि छाई।
शिल्पकार समाज
पुस्तैनी कारीगर — लोहार, बढ़ै, ओड, तमोटा अर ढोली/औजी — जौंका हुनर न मंदिर अर कूड़ा बणैन अर जौंकु संगीत हर संस्कार तैं पूरु करद। पहाड़ी संस्कृति मा ऊंकु योगदान सबसे भारी च।
जौनसारी
जौनसार-बावर की एक अनुसूचित जनजाति, जौंकि अपणि भाषा, त्यौहार, महासू द्यब्ता की पूजा अर खुमरी (गौं की पंचैत) की परंपरा च।
भोटिया / रं अर शौका
पिथौरागढ़, चमोली अर उत्तरकाशी की ऊँचि घाटियौं का लोग — कभि तिब्बत दगड़ि बैपार करदा छा, आज ऊनी कपड़ा, मौसम का हिसाब से ऐंच-मुंड आण-जाण अर अपणि भाषा-त्यौहारौं का बान जाणे जांदन।
थारू अर बुक्सा
दक्खिन मा तराई का बणौं का लोग, अपणि भाषा, नाच अर हस्तकला का दगड़ि — पहाड़ौं का तौळ मैदानी पट्टी का मूल बासिंदा।
राजी अर वन गुज्जर
राजी, भारत की सबसे छ्वटि जनजातियौं मा एक, अस्कोट का बणौं मा रौंदन; अर वन गुज्जर, बणौं मा भैंसा पाळण वळा, जु मौसम का हिसाब से शिवालिक अर ऊँचा बुग्यालौं का बीच आंदा-जांदन।
पहाड़ी जीवन कु ढंग
पाणि अर बण सब्यूं का। नौला (ढुंगौं का बंध्यां पंदेरा) अर धारा गौं वळौंन मिलिक बणैन अर संभाळिन; कुमाऊँ मा वन पंचैत आज बि गौं का बणौं तैं संभाळदि — यु तरीका आजकल का पर्यावरणवाद से बि पुराणु च।
जनानी, घौर-गौं की रीढ़। उकाळ बाटौं मा घास, पाणि अर लखड़ा ढोंदि-ढोंदि, जनान्यौंन सदनि पहाड़ै जिंदगी तैं थाम्यूं — अर येका सबसे नामी आंदोलनौं कु अगवाई बि करि, रैणी का चिपको से लेकि राज्य आंदोलन तक।
सेवा। लगभग हर परिवार मा एक फौजी च। गढ़वाल राइफल्स अर कुमाऊँ रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे ज्यादा सम्मान पाण वळि रेजिमेंटौं मा छन।
हर जगा भक्ति। डांडा, गाड, डाळा अर धारा पवित्र छन। द्यब्ता परिवार छन — नंदा एक ब्यटुलि च, गोलु एक न्यायाधीश जैतैं तुम चिट्ठी लेखि सकदां।

पलायन — खाली गौं
पहाड़ मा रोजगार, स्कूल अर अस्पताल नि होण से दशकौं बटि लोग देस जाणा छन। राज्य का ग्राम्य विकास अर पलायन आयोग न 2018 मा बताई कि 2011 का बाद सैकड़ों गौं पूरा खाली ह्वेगेन — जौंतैं 'भूतिया गौं' बोल्दन।
हर बंद होण वळु कूड़ा हमारि संस्कृति कु थोड़ा हिस्सा अपणा दगड़ि लिजांद। इलै यु संग्रह च — अर इलै आज कतगि पहाड़ी वापिस आणा छन, फिर से खेती, होमस्टे अर हस्तकला शुरू करणा छन।
© Varun Shiv Kapur · CC BY 2.0संग्रह मा योगदान द्या
यु एक जींदु संग्रह च। तुमारा भेज्यां हर गीत, फोटो, पकवान अर याद से यु बढ़द।
01
रिकॉर्डिंग
कथा सुणौंदा, गीत या जागर गांदा, या अपणि बोलि मा चीजौं का नौं बतांदा बुज़ुर्ग।
02
फोटो
परिवार की पुराणि फोटो, गौं का कूड़ा, त्यौहार, गैणा, औजार — जगा अर बरस का दगड़ि।
03
कथा अर पकवान
लोककथा जनि तुमारू परिवार सुणौंद; तुमारि दादी की रसोई का पकवान।
04
सुधार अर अनुवाद
क्वी गलती दिखे, क्वी अलग रूप पता च, या ये साइट कु अपणि भाषा मा अनुवाद करण चांदां? हमतैं बतावा।
सिरफ वी चीज भेजा जैतैं भेजण कु हक तुमतैं च, अर अपणि रिकॉर्डिंग अर फोटो मा दिख्येण वळा लोगौं से पैलि पूछि ल्या।