गढ़वाळ · पुराण कथा
शिव पांडवौं से लुकिन — पंच केदार
गढ़वाळ हिमालै मा शिव की पूजा पांच हिस्सौं मा किलै होंद।

कुरुक्षेत्र की लड़ै का बाद, अपणा ही भै-बंधौं तैं मारण का बान पांडव शिव से माफी मांगण चांदा छा। पर शिव ऊंसे मिलण नि चांदा छा, अर वु हिमालै मा एक बल्द कु रूप धरिक गोर्वौं का झुंड मा लुकि गेन।
भीम न ऊंतैं पछ्याणि याल अर एक घाटी का द्वी तरफ टांग फैलैक खड़ु ह्वेगे; सब गोर वेका तौळ बटि निकळि गेन, पर वु बल्द नि निकळि। जनि भीम न वेतैं पकड़ण चाई, बल्द धरती मा धंसण लगि।
शिव कु शरीर पांच जगौं मा फिर प्रकट ह्वे: केदारनाथ मा कूबड़, तुंगनाथ मा भुजा, रुद्रनाथ मा मुख, मध्यमहेश्वर मा नाभि, अर कल्पेश्वर मा जटा। यी पांचै मिलिक पंच केदार छन।
ऊंकि भक्ति से खुश ह्वेक शिव न पांडवौं तैं माफ करि दे। ऊंकि कथा पूरा गढ़वाळ मा पांडव नृत्य मा जींदि च, अर कतगि गौं मानदन कि स्वर्गारोहिणी जनै अपणि आखिरी जात्रा मा पांडव ऊंका गौं बटि गुजरि छा।
पहाड़ खुद पवित्र छन।
अगलि कथानंदा अपणा सौरास जांदि