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सब्बि कथा

गढ़वाळ अर कुमाऊँ · पुराण कथा

नंदा अपणा सौरास जांदि

पहाड़ै ब्यटुलि-देवी अर राजजात की जात्रा।

Nanda Badi Jat-Raj Jat 2026 at Bedni Bugyal.
© Rajat7878 · CC0

पहाड़ मा नंदा क्वी दूर की देवी नी — वा एक ब्यटुलि च। पहाड़ौं मा जलमीं, कैलाश मा रौण वळा शिव दगड़ि ब्यवयीं, वा हर वा पहाड़ी नौनि च जु ब्यौ का बाद अपणु मैत छोड़द।

गीत बोल्दन कि एक दा नंदा अपणा मैत ऐ अर भौत दिन रै, अर धरती तब तक बेचैन रै जब तक वींतैं ठीक से दाण-दैजा देकि विदा नि करे ग्याई। तब बटि वींका लोग वींतैं रीति-रिवाज से वींका सौरास पौंछौंदन।

यी च नंदा देवी राजजात: नौटी गौं बटि एक जात्रा जु बणौं, बुग्यालौं अर कंकाल वळा रूपकुंड ताल बटि होंदि होमकुंड तक चढ़द, जैकि अगवाई चार सींग वळु एक खाडु करद जु वींकु दाण-दैजा लिजांद। होमकुंड मा खाडु यखुलि अगनै पहाड़ौं मा चलि जांद।

बाटा मा गये जाण वळा गीत एक ब्वे का आंसू अर आसीसौं से भर्यां छन जु अपणि ब्यटुलि तैं विदा करणी च — इलै राजजात हर पहाड़ी कु हिया छू लींद।

पहाड़ अपणि देवी तैं अपणु परिवार मानदन।

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