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सब्बि कथा

गढ़वाळ · किंवदंती

माधो सिंह भंडारी अर मलेथा की कूल

एक सेनापति जु सुक्खा गौं मा पाणि ल्याई — सबसे बड़ि कीमत पर।

Landscape view of River Alaknanda at Srinagar Garhwal
© Nitin Maletha · CC BY-SA 4.0

माधो सिंह भंडारी गढ़वाळ का राजौं कु एक नामी सेनापति छौ, तिब्बत का खिलाफ लड़ाइयौं कु वीर। वेका अपणा गौं मलेथा मा उपजाऊ जमीन त छै पर पाणि नि छौ।

गाड कु पाणि पुंगड़ौं तक ल्यौण की ठाणिक माधो सिंह न डांडा की धार का आर-पार एक सुरंग खुदवै। पर जब सुरंग पूरी ह्वे, त पाणि नि बगि।

किंवदंती बोल्द कि देवी न सुपिना मा दर्शन दे अर बलि मांगि। माधो सिंह का यखुलि नौना गजे सिंह न अपणु आप तैं अर्पण करि दे। पाणि बगण लगि, अर मलेथा का सेरा हर्या ह्वेगेन।

मलेथा की 'कूल' (सिंचाई की नहर) आज बि पहाड़ै सबसे पुराणा इंजीनियरी कामौं मा याद करे जांद। लोक परंपरा गढ़वाळ की बाद वळि बग्वाळ, इगास बग्वाळ, तैं बि वे दिन से जोड़द जै दिन माधो सिंह का जीतिक वापिस आण की खबर घौर पौंछि।

सब्यूं की भलाई का बान त्याग — अर पहाड़ पाणि कु कतगा मोल समझदन।

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