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सब्बि कथा

गढ़वाळ · गाथा

जीतु बगड्वाल अर आंछरी

एक मुरुली बजौण वळु जैकि धुन इतगा मीठि छै कि आंछर्यौंन वेतैं जाण नि दे।

Chopta Valley
© Anindita Bhadra · CC BY-SA 4.0

जीतु बगड्वाल गढ़वाळ कु एक ज्वान छौ जु अपणि मुरुली का बान मशहूर छौ। जब वु बजौंदु छौ, त गौड़ी चरण छोड़ि दींदि छै अर गाड-गदन्या बि सुणदा सि लगदा छा।

एक बसंत वु रोपणी का बान अपणि भुली तैं घौर ल्यौण चलि। बण बटि जांदा-जांदा वेन मुरुली बजै — अर आंछर्यौंन, ऊँचा बुग्यालौं की परियौंन, वींतैं सुणि अर वींका जादू मा फंसि गेन।

ऊंन वेतैं ब्वाल कि वेतैं ऊंका दगड़ि चलण पड़लु। जीतु न अपणा सेरौं की रोपणी पूरी करण तक कु बगत मांगि। ऊ मानि गेन — पर जै दिन रोपणी पूरी ह्वे, वे ही दिन जब वु सेरा मा हळ लगाणु छौ, आंछरी ऐन अर वेतैं बल्दौं समेत लि गेन।

आज तक गढ़वाळ मा 'जीतु बगड्वाल' एक पूजा-नाटक का रूप मा नचे जांद, अर लोग आज बि ज्वान नौनौं तैं समझौंदन कि बुग्यालौं मा भौत मीठि मुरुली बजौंदा नि घुमा।

सुंदरता की अपणि ताकत होंद, अर पहाड़ अपणा भेद अपणा भितर रखदन।

अगलि कथामाधो सिंह भंडारी अर मलेथा की कूल