कुमाऊँ · किंवदंती
गोलु द्यब्ता अर लखड़ा कु घ्वड़ा
न्याय का द्यब्ता न एक ही सवाल से सच कनक्वे साबित करि।

कत्यूरी वंश का राजा झालराय की सात रानी छै पर क्वी वारिस नि छौ। शिकार मा वेतैं कालिंका मिलि, बड़ि ताकत अर भलाई वळि एक जनानी, अर राजा न वींदगड़ि ब्यौ करि। जब वींकु बच्चा होण वळु छौ, त जलण वळि रानियौंन वींका आंख्यौं पर पट्टी बांधि, वींका नयां ज्यां नौना की जगा एक ढुंगु धरि दे, अर बच्चा तैं एक पिंजरा मा धरिक गाड मा बगै दे।
एक माछु मरण वळा तैं वु पिंजरा मिलि अर वेन नौना तैं अपणा नौना की तरां पाळि। जब नौना न घ्वड़ा मांगि, त माछुवारा न वेखुणि लखड़ा कु घ्वड़ा बणै दे — अर बोल्दन कि नौना न वेतैं जींदु करि दे।
एक दिन नौनु अपणा लखड़ा का घ्वड़ा पर चढ़िक वीं गाड मा ग्याई जख सातौं रानी नहाणी छै, अर घ्वड़ा तैं पाणि पिलौण लगि। रानी हैंसिन: 'बेवकूफ, लखड़ा कु घ्वड़ा पाणि कनक्वे पेलु?'
वेन जबाब दे: 'जब एक जनानी ढुंगु जलम दे सकद, त लखड़ा कु घ्वड़ा पाणि किलै नि पे सकदु?'
यु बात राजा तक पौंछि। सच सामणि ऐ ग्याई, कालिंका कु मान ह्वे, अर नौनु राजा बणि — जैतैं पूरा न्याय करण वळा राजा का रूप मा याद करे जांद। आज गोलु द्यब्ता की पूजा चितई, घोड़ाखाल अर चंपावत मा होंद, जख अन्याय सैण वळा लोग ऊंतैं अपणि अर्जी लेखदन, अर न्याय मिलण पर घांडि चढ़ौंदन।
सच अपणु बाटु खोजि लींद, अर न्याय सब्यूं कु च।
अगलि कथाराजुला अर मालूशाही